New Post

स्वयं संघ को अंदर से देखिए और अनुभवों के आधार पर अपना मत बनाइए: डॉ. मोहनराव भागवत

नई दिल्ली: पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रांत द्वारा विज्ञान भवन में आयोजित किया गया तीन दिवसीय व्याख्यानमाला चर्चा का विषय बना हुआ है. कहा जा रहा है कि 1925 में संघ की स्थापना के बाद पहली बार इस प्रकार का आयोजन किया गया है. इस कार्यक्रम के पहले दिनSS उत्तर क्षेत्र के क्षेत्र […]

Continue Reading

वर्तमान समय में देशभक्ति

अगर किसी से हम यह पूछे कि समय क्या है ? तो उसका उत्तर होगा ढाई बजे हैं, या तीन बजे हैं l या वह उचित समय कि वर्तमान स्थिति को बताएगा जो उस क्षण घड़ी में होगी l लेकिन वास्तव में समय क्या है? तो इसका उत्तर है ” अस्तित्व कि सम्पूर्ण यात्रा में […]

Continue Reading

आज की भाषा

ट्रेंड्ज़ के चलते भाषा का स्वरुप तेज़ी से बदलता जा रहा है| अब वह समय गया जब ‘दूरदर्शन’ या ‘आकाशवाणी’ पर बोले जाने वाली भाषा को आम भाषा कहा जाता था ,अब तो उस भाषा को ‘अति –कठिन’ माना जाता है | यूँ तो बहुभाषिक होना एक गुण होता है परन्तु हर भाषा में अन्य […]

Continue Reading

CHINA’S DEBT TRAP : IMPERIALISM VERSION 2.0

Snap! 21st Century is running wild, Smart-phones and Cheap Electronics are the coolest trends and the Asian nation of China happens to be the latest trendsetter. In a World tired of Uncle Sam’s lame tricks, China appears to be the newest flag-bearer of the glorious scheme of Industrialization. The Communist Party of China, the party […]

Continue Reading

महाकवि प्रसाद ( 30 जनवरी, 1890- 15 नवंबर,1937)

चंद्रशेखर आजाद : मुझे लगता है कि मैं आपको हर बार मुश्किल में डाल देता हूँ , प्रसाद जी । जयशंकर प्रसाद : भारत को आजाद कराने के लिए पंडित चंद्रशेखर जो लड़ाई लड़ रहा है उसमे जो कुछ भी सहयोग कर सकूँ तो इससे बड़ा सौभाग्य क्या होगा । आप संकोच न करे इस […]

Continue Reading

सुभद्रा कुमारी चौहान

“सिंहासन  हिल  उठे,  राजविंशों  ने  भृकुटि  तानी  थी, बूढ़े  भारत  में  आयी  फिर  से  नई  जवानी  थी, गुमी  हुई  आज़ादी  की  कीमत  सब  ने  पहचानी  थी, दूर  फिरिंगी  को  करने  की  सब  ने  मन  में  ठानी  थी, चमक  उठी  सन  सत्तावन  की  वह  तलवार  पुरानी  थी, बुिंदेले  हरबोलों  के  मुख  हमने  सुनी  कहानी  थी, खूब  लड़ीमर्दानी  […]

Continue Reading

‘माँ’ की इच्छा के बिना ‘मातृभाषा’ कैसे?

हाय गायज़! (अंग्रेज़ी शब्द हाय व गायज़) आप सोच रहे होंगे कि ये कैसा अभिवादन हुआ। लेकिन ‘नमस्कार’ पढ़ कर आपकी रूचि इस लेख से चली न जाए इसलिए लेखक को ऐसा करना आवश्यक लगा। दरअसल नमस्कार बोलना हमने सीखा ही नही। बचपन में जब माता जी पी.टी.एम. में साथ जाया करती थी तो टीचर […]

Continue Reading