एक क्रन्तिकारी जिसने पूरे चटगाँव शहर को अंग्रेजों से आजाद करा लिया था: मास्टर दा
साल था 1894, ये वो समय था जब भारत में अंग्रेजी हुकूमत के लिए आक्रोश अपने चरम पर था, भारत में क्रांतिकारी गतिविधियों की धमक यदा कदा सुनाई दे ही जाती थी| जहाँ एक तरफ क्रांतिकारी सशस्त्र विरोध प्रदर्शन में लगे हुए थे तो वहीँ लगभग एक दशक पुरानी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इसे राजनितिक तरीकों […]
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